अगर आपका पेट सही है, तो आपको कोई बीमारी नही होगी। मतलब, सिर्फ पेट नही, बल्कि पूरा Gut System अगर ठीक से काम करे, तो आप बीमारियों से बचे रह सकते हैं।
Gut का Healthy रहना बेहद Important है, क्योंकि हमारा Gut Health ही हम जो भी foods & Drinks खाते पीते हैं, उसको Body के लिए Absorbable बनाता है। इसलिए Gut Health को Maintain करना हमारी Overall Health के लिए जरूरी है। Deworming से पेट में पैदा होने वाले कीड़ों को समाप्त किया जाता है, Deworming करने के बाद ही Gut Naturally काम कर पाता है।
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Deworming क्या है? | What is Deworming?
Deworming अर्थात आपके अपने आंतों में, या शरीर के अन्य किसी हिस्से में, कब्ज, अपच, एसिडिटी या गलत खानपान या अन्य किन्हीं कारणों से पैदा हो चुके सभी प्रकार के कीड़ों को किसी दवा या अन्य किसी तरीके से समाप्त करना Deworming कहलाता है।
अपने शरीर का Deworming करना क्यों इतना जरूरी है?
अक्सर कब्ज या मिलती-जुलती पेट की अन्य समस्याओं के कारण Gut System के कुछ हिस्सों में, अधिकतर आंतों में, कई प्रकार के कीड़े पैदा हो जाते हैं। ये कीड़े पाचन तंत्र की पाचन प्रक्रिया में बाधा पहुंचाते हैं, इन कीड़ों की वजह से आंतों में कब्ज की समस्या होती है, पेट का मल (stool) पूरी तरह से समय समय पर साफ नही हो पाता है।
जब पेट समय-समय पर पूरी तरह से साफ नहीं हो पाता है, किसी भी कारण की वजह से, तो मल मलाशय (Rectum) में और बड़ी आंत (Large Intestine) में जमा होता रहता है,
जब कोई भी Food Particle (भोजन या खाने का कोई छोटा टुकड़ा या अंश) एक निश्चित समय के बाद भी Gut की किसी समस्या के कारण मल (stool) बनकर हमारे शरीर से बाहर नही जाता है, तो ये Food Particles आंतों में अधिक समय तक रहने की वजह से वहाँ सड़ता है
Food Particles सड़कर आंतों में गर्मी पैदा करता है, और आंतों की ये गर्मी बहुत खतरनाक होती है। पेट की इस गर्मी की वजह से हमारे शरीर में अनेक बीमारियां होने लगती हैं। इसलिए, आंतों की इस गर्मी से बचने के लिए, कभी भी पेट में कब्ज न होने पाए, इसका ध्यान रखना चाहिए।
आंतों में कीड़े पैदा होने के मुख्य कारण क्या-क्या होते हैं? | Main Causes of Intestinal Worms.
आंतो में कीड़े पैदा होने के कुछ मुख्य कारण होते है, जो निम्नलिखित है।
कब्ज (Constipation) क्या होता है, कब्ज किसे कहते है?
यदि हमने जो भी Foods & Drinks खाया-पिया है, उससे बना मल मलाशय और बड़ी आंत में दो-तीन दिन तक पड़ा रहता है तो इसी को कब्ज कहा जाता है, जब पेट में किसी भी कारण से कब्ज हो जाता है, तो फिर जब आप 36 घंटे या 48 घंटे बाद लैट्रिन (मल त्याग) करते हैं तो आपका पूरा मल बाहर नहीं आ जाता है केवल मल का कुछ हिस्सा 30%, 40%, या 50% के आसपास ही मल बाहर निकलता है, पूरा पेट 100% साफ नहीं होता है, मतलब यह है पूरा मल पेट से बाहर नहीं आता है, मल का कुछ हिस्सा आंतो में पड़ा रहता है।
कब्ज से कैसे आंतों में कीड़े पैदा होते हैं?
जब पेट में कोई मल कई दिनों तक पड़ा रहता है, तो वह सड़ने लगता है बिलकुल वैसे ही, जैसे अगर आप कोई पका हुआ भोजन (Food) जैसे रोटी, चावल, दाल, या अन्य कोई खाने पीने वाली चीज़ किसी बर्तन में बंद करके बाहर रख दें, तो वह खाना कुछ देर बाद बासी हो जाएगा, दाल खट्टी हो जाएगी, चावल खराब हो जाएगा, रोटी भी खाने लायक नहीं बचेगी।
भोजन बासी होने के बाद, 12 घंटे उस खाने वाली चीज़ को और उसी बर्तन में बंद करके रख दें, तो Fungus, Worms अपने आप पैदा होने लगेंगे।
“जहाँ पर कोई चीज़ सड़ता है तो वहाँ पर कीड़े अपने आप पैदा हो जाते है।”
यकीन नही होता है तो रख दीजिए किसी भोजन को किसी बर्तन में बंद करके कुछ दिनों के लिए, फिर देखिए उस सड़े हुए चीज़ से कैसा दुर्गन्ध आता है, कैसा गर्मी निकलता है।
ऐसा ही पेट के साथ भी होता है, जब पेट में खाना सड़ता है, तो कीड़े (Worms) अपने आप आंतो में पैदा हो जाते हैं, खाने की सड़न और आंत में कीड़ों, की वजह से पेट में गर्मी पैदा होने लगती है।
इसलिए 24 घंटे में एक बार पेट को अच्छे से (Near About 100 %) साफ होना बेहद जरूरी है, वैसे ही जैसे बाहर बंद बर्तन में रखा खाना (Food) बासी होने के बाद सड़ने लगता है वैसे ही पेट में पड़ा मल 24 घंटे बाद सड़ने लगता है, इससे पेट में गर्मी उत्पन्न होने लगती है और आंतो में कीड़े भी पैदा होने लगते हैं।
इसलिए, 24 घंटे में एक बार पेट को ठीक से साफ करने पर आपको ध्यान देना चाहिए। अपने छोटे बच्चों का भी 24 घंटे में एक बार पेट साफ हो जाए इसका ध्यान रखना चाहिए। लाख जतन करके पेट को हमेशा साफ रखना चाहिए। Gut Health यदि Strong होता है तो पूरा Body Healthy रहता है।
इसलिए समय-समय पर अपना और अपने बच्चों का DEWORMING जरूर करना चाहिए।
पेट में कीड़े हैं या नही इसकी पहचान कैसे करें?
पेट में कीड़े हैं कि नहीं हैं इसकी पहचान करने के लिए आप किसी खुली जगह पर मल त्याग करें, जब पूरी तरह से मल त्याग कर चुके हों तब दो-तीन मिनट के बाद अपने मल का निरीक्षण करें, नजदीक से अपने मल को ध्यान से देखें क्या उसमें छोटे-छोटे सफेद या ऐसे ही किसी रंग के कीड़े रेंगते हुए दिखाई दे रहे हैं कि नहीं? बिल्कुल नजदीक से आप जब देखेंगे तो अगर पेट में आपके कीड़े हैं तो वह कीड़े आपको रेंगते हुए मल में दिखाई देंगें। अगर कीड़े दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत आप अपना डी वार्मिंग (Deworming) कर लें।
अगर कीड़े नहीं दिखाई दे रहे हैं, तो भी आपको डी वार्मिंग अपना कर ही लेना चाहिए, क्योंकि कभी-कभी कुछ प्रकार के कीड़े आंतों में रहते हैं, लेकिन जो खुली आंखों से दिखाई नहीं देते हैं, उन कीड़ों को पता करने के लिए आपको मल की जाँच (Stool Test) करवाना पड़ेगा।
Deworming कब-कब करें?
पेट में होने वाले कीड़े मुख्यतः कब्ज (Constipation) की वजह से होते हैं, और आंतों में पैदा हो जाने के बाद ये कीड़े कब्ज को और बढ़ाते भी हैं। इसलिए, साल भर में दो बार Deworming अपना व अपने परिवार के छोटे-बड़े सभी सदस्यों का जरूर करना चाहिए।
अगर पेट में कब्ज रहता है तो प्रत्येक 6 माह के अंतराल पर डीवॉर्मिंग किया जा सकता है, लेकिन अगर कब्ज नहीं रहता है तो सालभर में एक बार भी डीवॉर्मिंग पर्याप्त होता है।
Deworming कैसे करें?
Generally डीवॉर्मिंग के लिए Albendazole और Ivermectin का प्रयोग किया जाता है। Bandy-Plus Tablet से आप अपना डीवॉर्मिंग कर सकते हैं। उम्र के हिसाब से खुराक बच्चों का अलग, बड़ो का अलग होता है, इसलिए अपने डॉक्टर से डीवॉर्मिंग दवा की खुराक के बारे में पता कर लें।
बच्चों का Deworming करने के लिए Bandy-Plus Syrup दिया जाता है।
कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। मैं सिर्फ आपको Deworming के महत्व को समझाना चाहता हूँ। ताकि आप अपने Health के प्रति जागरूक बने, अपना डीवॉर्मिंग कर लें, और स्वस्थ बने रहें।
Deworming करते समय किन किन बातों का ध्यान रखें?
डीवॉर्मिंग करते समय आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- सही दवा का चुनाव करें।
- उम्र के अनुसार सही खुराक लें।
- औरतें Pregnancy में डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें।
निष्कर्ष (Conclusion)
अतः Digestive System को Healthy बनाए रखने के लिए समय समय पर Deworming करते रहना चाहिए।
Frequently Asked Questions:
पेट में कीड़े होने के क्या लक्षण होते हैं?
अक्सर पेट में कब्ज व मल कठोर रहता है।
कितने समय के अंतराल पर डीवॉर्मिंग करनी चाहिए?
6 माह के अंतराल पर डीवॉर्मिंग करना चाहिए।
Pramod Prajapati is an Indian author, entrepreneur, life coach and motivational speaker. He helps individuals to master their entrepreneurial and life skills. He is dedicated to liberating minds from the cycle of addiction through his book. “Tripti: The Addiction Freedom Blueprint.”
वे लोगों को नशे की लत से बाहर निकलकर अपनी जिंदगी बदलने के लिए प्रेरित करते हैं। अपने व्यक्तिगत अनुभव और आसान तरीकों के माध्यम से, गुटखा, तम्बाकू, बीड़ी, सिगरेट, शराब, भाँग गांजा, इंटरनेट की लत, पोर्न और हस्तमैथुन की लत, गुल मंजन की लत, और अन्य बुरी आदतों को छोड़ने के तरीके शेयर करते हैं। इनका उद्देश्य लोगों को एक स्वस्थ, अनुशासित और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है।
They firmly believe that Truth and Honesty are the only keys to achieving success in all areas of life.